जादुई कहानी

जादुई कहानी

जादुई कहानी:

एक गांव में राम नाम का लड़का रहता था। वह बहुत गरीब था। उसका खाना पीना बहोत मुश्किल से चल पता था। वह लकड़ी काटकर अपना पालन पोसड कटा था।

राम हर रोज लकड़ी काटने जाता था।  और उस लकड़ी को बाजार में बेचता था। और पैसे कमाता था। उसी पैसे से वह अपने घर वालो का पालन पोसड करता था।

एक दिन वह लकड़ी काटने जंगल गया। एक पेड़ में लकड़ी काट रहा था। की उसे अचानक एक आवाज सुनाई दी। राम ने  पीछे  मुड़कर देखा तो उधर कोई नहीं था।

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राम ने सोचा की ये मेरा वह्म होगा। यह सोचकर राम फिर से लकड़ी काटने लगा। एक बार फिर अचानक आवाज अति है। राम बोहोत दर  गया। और निचे उतरने लगा।

निचे उतरते ही राम जाने वाला ही था की उसे पेड़ से आवाज आई। तो राम ने पेड़ के सामने देखा तो पेड़ से आवाज  आ रही थी। राम यह देखकर सोच में पढ़ गया। और सोचने लगा ऐसा कैसे हो सकता है। की पेड़ बोल कैसे सकता है।

 पेड़ : पेड़ से  फिर आवाज आई की मुझे मत काटो मै आपको बोहोत कुछ दे सकता हु। और राम से कहा तुम दूसरे पेड़ को काट लो।

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राम : राम ने सोचा की यह पेड़ बोहोत अच्छा है। यह बोल सकता है तो सायद ये मेरे कुछ काम आ जाये। ये सोचकर राम ने उस पेड़ को नहीं कटा। और दूसरे पेड़ को काटने लगा।

पेड़ : पेड़ से फिर आवाज आई।  की हम दोस्त बन सकते है और मुझे न काटने के लिए मै जरुरत के समय तुम्हारी मदद करूँगा।

राम हर दिन जंगल में जाया करता था।  और लकड़ी कटा करता था। और उस  जादुई पेड़ से मिलता था। उससे बात करके राम बोहोत खुस होता था।

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राम जिस दिन से उस पेड़ से मिला था।  राम को उसी दिन से दिन दो गुनी रत चुगनी तरक्की हो रही थी। यह सब सोचकर राम बोहोत खुस रहता था।

राम हर दिन जंगल में जाता था।  और जंगल से लकडिया लता और बोहोत अच्छे दामों में बेचता था। यह सब देखकर उसके पडोसी सोचते थे। की यह कैसे इतना आमिर होता जा रहा है।

एक दिन राम लकड़ी काटने जा रहा था। उसका पडोसी हल्कू राम के पीछे लग गया। यह देखने के लिए की वह कहा जाता है। और क्या करता है।  इतना आमिर कैसे होता जा रहा है।

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राम सीधा जंगल में गया। और उस जादुई पेड़ से बात करने लगा यह देख कर हल्कू सोच में पड़ गया की पेड़ कैसे बात कर सकता है।

हल्कू यह देखकर उधर से चला गया। और राम जब उधर से चला गया तो हल्कू उस पेड़ के पास जाकर उस पेड़ को आग लगा दी। और उधर से चला गया।

जब राम जंगल में आया उस पेड़ से मिलने तो उस पेड़ को जलता देखकर बोहोत दुखी हुआ और रोने लगा।  ऐसा नहीं हो सकता तुम्हे आग किसने लगा दी।

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राम जोर जोर से रोने लगा। तब उस पेड़ से आवाज आई। की दोस्त तुम रो नहीं। मै इस दुनिया से जा रमा हु। पर जाने से पहले तुमसे चार बरदान देता जा रहा हु।

पेड़ ने राम को चार बरदान दिए और पेड़ जलकर खाक हो गया। राम बोहोत दुखी हुआ और उधर से चला गया।
यह सब कहानी अपनी बीबी से बताई। और कहा की उस जादुई पेड़ ने मुझे चार बरदान दिए है।

राम ने  चार बरदान से से एक बरदान में उस जादुई  पेड़ को जिन्दा होने का मांग लिया। दूसरा बरदान अपने खूब सारा आमिर होने का मैग लिया।

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तीसरा बरदान राम ने उस जादुई  पेड़ के बारे में मांगा की वह कभी भी न मरे हमेसा जिन्दा रहे। और हरा भरा रहे। और उसे कोई भी  जला न  सके।

चौथा राम ने  यह मांगा की जिस बगीचे में  मै लकड़ी काटने जाता था वह बगीचा मेरा हो जाये। राम ने चारो बरदान मैग लिए।

राम  खुसी खुसी रहने लगा। और उस जादुई  पेड़ को कोई भी  काट नहीं पाया और न ही कोई जला पाया। 

 
Published By – Kaushlendra Kumar

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