जादुई तूफान लाने वाली बेटी।

जादुई तूफान लाने वाली बेटी।

 

रसपुरा नाम का एक गाव था। गाव में समीरा और कबीर नाम के दो भाई बहन रहते थे। उनके पापा जब साम को नौकरी से लोट कर आते तो कोई न कोई मिठाई ले कर आते।

पापा आ गए … , पापा आ गए … , पापा आ गए … , पापा आ गए …

पापा आज क्या ले कर आए हो आज मई बेसन के लड्डू लाया हु। समीरा और कबीर की माँ ने हमेसा की तरह समीरा को ज्यादा लड्डू दे दिए।

समीरा लड्डू ले कर अपने कमरे में चली गई। माँ ये सरासर अन्याय है आप मेरे साथ गलत कर रहे है कोई भी चीज आती है तो समीरा को ज्यादा क्यों दी जाती है।

मई ये मामला कचेहरी तक ले कर जाऊंगा। गुस्सा मत कर बेटा समीरा को हम कुछ जान मुचकर ज्यादा देते है ताकि वो खुस रहे और कभी गुस्सा न करे उससे गुस्सा आ जायेगा तो कोण सी आफत आ जाएगी मुझे भी तो गुस्सा आता है।

बोहोत बड़ी आफत आ जाएगी उसे रोकना फिर हमारे हाथ में नहीं होगा तुम मेरे साथ हलवाई की दुकान पर चलो तुम जितनी चाहो उतनी मिठाई खा लेना।

कबीर अपने बाबा के साथ हलवाई की दुकान पे गया और सारी मिठाईया खाई। क्या अब तुम खुस हो भेद भाव का मामला लेकर कचेहरी में तो नहीं जाओगे।

पापा अब मई खुस हूँ लेकिन एक बात समझ में नहीं आती समीरा को गुस्सा आने में क्या हो जायेगा।

बेटा तुम्हारी बहन तुम्हारी तरह साधारण नहीं है तुम्हे याद है कई साल पहले हमें सहर छोड़कर गांव बसना पड़ा था। हा मुझे याद है।

वो समीरा के कारन हुआ था सन्ध्या को जब गुस्सा आता है तो वो मानव तूफान ला देती है। शहर में उसके तूफान के कारन कई माकन गिर गए थे।

इस लिए हम लोग भाग कर यहाँ आ गए। समीरा के माता पिता कोशिस करते थे की समीरा घर से बहार न जाये वे उसे घर पर ही शिक्षा देते थे समीरा अगर कोई चीज मांगती तो उसे घर पर ही ला कर दे दी जाती।

लेकिन एक दिन समीरा के माता पिता मुसीबत में पड़ गए जब समीरा ने सिनेमा हाल जाने की ज़िद की पापा मुझे मूवी देखने सिनेमा जाना है मै आज तक सिनेमा हाल नहीं गई हूँ सन्घ्या तुम्हे जो भी मूवी देखनी है उसकी कैसिट लेकर हम घर में पॉपकान खाते खाते मूवी देखेंगे नहीं पापा मुझे सिनेमा हाल देखने जाना है।

मुकेश ने समीरा की बात का ज्यादा विरोध नहीं किया क्योकि उसे दर था की समीरा का ज्यादा विरोध करने पर समीरा को क्रोध न आ जाए ठीक है हम अगली सुबह डायनासोर वाली मूवी देखने चलेंगे।

अगले दिन मुकेश का परिवार मूवी देखने पहुँचा समीरा अपनी कोल्ड्रिंग का गिलास सीट के हैंडल पर रख रही थी की गिलास लुडक कर बराबर वाली सीट पर बैठी लड़की के ऊपर गिर गया और लड़की के कपडे खराब हो गए।

माफ करना मै गिलास सीट के हैंडल में रख रही थी तो गई गया बत्तमीज तुझे तमीज नहीं है तूने मेरी नई ड्रेस का सत्या नाश कर दिया लड़की समीरा को थप्पड़ मर देती है।

समीरा को भयानक गुस्सा आ गया समीरा को गुस्सा आते ही भयानक हवा चलने लगी सीट सिनेमा हाल का पर्दा सब कुछ हवा में उड़ गया लोग भी हवा में उड़ कर इधर उधर गिरने  लगे।

मुकेश ने समीरा का हाथ पकड़ा और माँ ने कबीर का हाथ पकड़ा फिर वे लोग नदी की ओर भाग गए नदी में एक नाव पड़ी थी मुकेश ने सब को नाव में बैठाया और नदी के उस पार चले गए ।

तूफान कई घण्टे तक सन्त नहीं होगा इस लिए हम इस पार रहेंगे अगर गांव में किसी को पता चल गया की तूफान समीरा के वजह से आया है तो वो लोग गांव में हमें रहने नहीं देंगे।

पिता जी क्या समीरा की बीमारी का कोई इलाज नहीं है। बेटा ये प्रकृति सकती है इसका कोई इलाज नहीं है।

मुकेश जंगल में कुछ खाने के लिए लेने गया और उसने देखा की एक साधु तपस्या कर रहे है मुकेश उधर गया और बोला साधु जी मई आपकी तपस्या भांग करने नहीं आया हूँ।

क्या आप बता सकते हो की इस जंगल में खाने के लिए क्या मिल सकता है। इस जंगल में अमरुद और आम मिल जायेगे लेकिन तुम यहाँ क्यों आए हो।

मुकेश समीरा के बारे में सब बताता है महात्मा जी क्या आपके पास इस समस्या का कोई इलाज है साधु ने मुकेश को कुछ जड़ीबूटी से बानी कुछ गोलिया दी और कहा इन गोलियों को अपनी लड़की को सुबह रोज खिलाना ये हजार गोलिया है कुछ वर्षो में उसका क्रोघ सन्त हो जायेगा और फिर वो तूफान नहीं ला पायेगी।

मुकेश बहोत खुश होकर गोलियों से भरा डब्बा लेकर अपने परिवार के पास पहुंचा अब हम लोग गांव लौट सकते है हमें डरने की जरुरत नहीं है क्योकि समीरा के बीमारी का इलाज मिल गया समीरा बेटी तुम्हे एक गोली रोजाना सुबह खानी है।

मुकेश का परिवार घर की ओर जाने लगा नाव में बैठकर कबीर गोलियों से भरा डिब्बा देखने लगा ये गोलिया तो घास की बानी लग रही है अचानक एक तेज लहेर आई और कबीर के हाथ से गोलियों का डिब्बा छूट कर हाथ से गिर गया।

अरे नहीं ये क्या किया तुमने कवीर मैंने नहीं किया तेज लहेर आई और मेरे हाथ से गोलियों का डिब्बा गिर गया।

नदी में एक मगरमछ था मगरमछ ने गोलियों से भरा पूरा डिब्बा निगल लिया मुकेश नदी में कूद पड़ा मुकेश ने अपनी जेब से चाकू निकाला और नदी के अंदर घुस कर मुकेश का पेट चीड़ डाला।

उसने मगरमछ के पेट से गोलियों से भारा डिब्बा निकाल लिया और वापस नाव में आ गया थोड़ी देर में नाव नदी के किनारे पहुंच गई।

मुकेश का परिवार रोते हुए उससे लिपट गया पिता जी आपको कुछ हो जाता तो हमारा क्या होता।

बेटा तुम्हारी समस्या ख़तम करने के किये मेरा नदी में कूदना बहोत जरुरी था। मुकेश का परिवार वापस गांव पहुंचा घर वगैरह सब टूर गए थे उन्होंने मिलकर दोबारा अपना घर बनाया और खुसी से रहने लगे।

 

Published By – Kaushlendra Kumar

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